26 दिनों तक चले आमरण अनशन के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना धरना समाप्त कर दिया। सरकार की ओर से लिखित आश्वासन मिलने के बाद लिया गया यह फैसला अब नई बहस का विषय बन गया है। जहां एक ओर कुछ लोग इसे बातचीत और लोकतांत्रिक समाधान की दिशा में उठाया गया कदम मान रहे हैं, वहीं आंदोलन से जुड़े कई छात्र और समर्थक सवाल उठा रहे हैं कि क्या उनकी मुख्य मांगें पूरी हुईं? कई प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि उन्होंने परीक्षा प्रणाली में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे जैसी मांगों को लेकर लंबे समय तक प्रदर्शन किया। उनके अनुसार, जब आंदोलन के दौरान छात्र सड़कों पर उतरे, पुलिस कार्रवाई का सामना किया और लगातार अपनी आवाज बुलंद करते रहे, तब उन्हें उम्मीद थी कि आंदोलन अपने घोषित उद्देश्यों तक जारी रहेगा।
दूसरी ओर, सोनम वांगचुक ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि सरकार ने परीक्षा व्यवस्था पर संसद में चर्चा, जवाबदेही तय करने, पेपर लीक से प्रभावित परिवारों के लिए सहायता और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई न करने का लिखित आश्वासन दिया है। उनके अनुसार, यही आश्वासन अनशन समाप्त करने का आधार बना। हालांकि, आंदोलन से जुड़े कुछ लोगों का मानना है कि अभी भी उनकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं हुई हैं। इसी वजह से प्रदर्शन के भविष्य और उसकी दिशा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे व्यावहारिक निर्णय बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे आंदोलन की गति पर असर डालने वाला कदम मान रहे हैं। फिलहाल, यह स्पष्ट है कि अनशन समाप्त होने के बावजूद शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा सुधार और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर बहस जारी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार अपने दिए गए आश्वासनों पर क्या कदम उठाती है और आंदोलन से जुड़े समूह अपनी आगे की रणनीति क्या तय करते हैं।
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